poetry section

  • समीक्षार्थ एक रचना

    समीक्षार्थ एक रचना – जागो रे ! मज़दूर – किसानो मेहनतकश मज़बूर दिवानो अपना हक़ लेने की खातिर लड़ना होगा रे ! इंसानो ओ रे...

  • नारी का सम्मान

    महिला दिवस के अवसर पर कविता नारी का सम्मान हे नारी तेरी महिमा को मैं किन शब्दों में गाऊं तेरी तपस्या की महिमा शब्दों में...

  • प्रेम न बाडी उपजै

    पतझड़ मेंं भी गुलज़ार मेंं रंग भर जाता हैं जब रूहानी , रूमानी इश्क़ ए मर्ज़ हो जाता हैं इश्क़ , मोहब्बत , प्रेम ,...

  • आखिर दिया तले अंधेरा था

    जख्मों की टीस से भी ज्यादा अंतस का दर्द गहरा था। किस को कहती बेटी, आखिर दिया तले अंधेरा था। हर उठती आवाज को दबाने...

  • वक्त है चल कुछ कर गुजर….

    वक्त है चल कुछ कर गुजर।. मौका है , समय है चल कुछ गुजर।। वक्त है चल कुछ कर गुजर। मौका है , समय है...