हाईटेक होते छात्रसंघ चुनाव

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छात्र राजनीति लोकतंत्र के अधिगम का प्रथम सौपान छात्र संघ चुनाव है, पर अब चुनाव पहले की तरह सीधे सादे नही रहे। 2019 का छात्रसंघ चुनाव तकनीक आधारित चुनाव का प्रतीक बन गया है ,इसी क्रम मे प्रतिनिधियों ने अपनी स्टाइलिश फोटो और कैंपस से जुड़े वायदे-घोषणाएं भी सोशल साइट पर अपलोड कर दिए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की तरह छात्रसंघ चुनाव भी जबरदस्त हाईटेक बन चुके हैं ।छात्रसंघ चुनाव में पोस्टर-होर्डिंग लगाने और दीवारें रंगने पर भले पाबंदी हो, लेकिन छात्रनेताओं ने सोशल मीडिया, पर धुआंधार प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। कैंपस में व्यक्ति संपर्क के अलावा फेसबुक , वॉट्सएप , यूट्यूब , ट्विटर, पर वोट मांगते देखे जा रहे हैं। अपील का शायराना अंदाज भी देखने को मिल रहा है।

उदाहरणत:
*”मिला साथ तो गुजर जाएगा ये कारवां…, दिल के कोने में हैं हम, नहीं किसी से कम…., कुछ कदम तुम चले, कुछ हम…”* जैसे संदेश सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। छात्र-छात्राओं ने स्टाइलिश फोटो और कैंपस से जुड़े वायदे-घोषणाएं भी अपलोड की हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की तरह छात्रसंघ चुनाव भी जबरदस्त हाईटेक बन चुके हैं। संभावित प्रत्याशियों ने हाईटेक प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया एक्‍सपर्ट का सहारा लिया है। चुनाव मे संपर्क को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँच मे लाने के लिए टेक्नोक्रेट्स का सहारा लेना क्रांतिकारी प्रयोग है।

फेसबुक और वॉट्सएप, यूट्यूब के अलावा ट्विटर पर मैसेज, फोटो, वीडियो को समर्थन मे पोस्‍ट को सांझा करने की प्रतिस्‍पर्धा हो रही है। भावी नेताओं ने इसकी जिम्मेदारी इंजीनियरिंग,और मैनेजमेंट, कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थियों, दूसरे शहरों से आए दोस्तों को सौंपी है। इन तकनीकी विशेषज्ञों ने आकर्षक संदेश, कट आउट और डिजाइनिंग कार्ड तैयार किए हैं।
*”यॉर कैंपस यॉर लीडर…”* की तर्ज पर तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों ने छात्रसंघ चुनाव के नारे, स्लोगन और आकर्षक संदेश तैयार किए हैं। यथा *”प्लीज वोट एन्ड सपोर्ट.., नहीं करते झूठे वायदे, पक्के हैं हमारे इरादे…, दीजिए हमें भी एक बार मौका…, चले-चले भाई शेर चले…”* जैसे संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। विशेषज्ञों की टीम छात्र-छात्राओं से मिल रहे कमेंट अैार फीडबैक को लेपटॉप मोबाइल में नोट भी कर रही है।
इसी तरह कॉलेज और विश्वविद्यालय से चुनाव लडऩे वाले विद्यार्थियों ने हॉस्टल और कॉलोनियों में वार रूम बनाए हैं। इन्हें चुनाव कार्यालय में तब्दील किया गया है। एनएसयूआई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक शुरू हो गई हैं। टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों का जमावड़ा लगा हुआ है।

प्रत्याशी चयन में जातिगत समीकरण, कैंपस में किए गए कामकाज, मतदाताओं पर पकड़ और अन्य बिन्दुओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है। खासतौर से इन चुनावो मे स्थापित नेता भी चुनावी जंग मे जिम्‍मेदारी संभाले हुए है। चुनाव के प्रति बढता झुकाव लोकतंत्र की मजबूती को दिखाता है,वही चुनावो मे बढता खर्च लोकतांत्रिक युग मे एक बडे खतरे की और ध्यान इंगित करता हैं ,साथ ही जाति,धर्म ,क्षेत्र जैसे मुद्‍दे चुनाव को कही कही शीत युद्‍ध जैसा जटिल भी बना रहा है। कही कही व्‍यवस्‍था और विकास के नाम पर भी वोट मांगे जा रहे है। लेकिन कुल मिलाकर चुनाव प्रबंधन एवं तकनीकी का सामाजिक अनुप्रयोग भावी राजनीति का संकेत भी देती है,इसलिए इसका सही नियोजन भविष्य के लिए सही दिशा हो सकता है।

– डाॅ.भावना शर्मा
झुंझुनू,राजस्थान ।

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