श्री कृष्‍ण का युवाओं को संदेश

Facebook
Google+
https://newsquesindia.com/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8">
Twitter
LinkedIn
INSTAGRAM
SOCIALICON

छात्रसंघ चुनाव चल रहे है,लोकतंत्र के समर मे नए कृष्‍ण अर्जुन तैयार हो रहे है। नायक के नए प्रतिमान बन रहे है । पुरातन संस्‍कृति का नवाचार हो रहा है। आज भी सगर्व कहते है कि हम उस देश के वासी है जहाँ सबसे बड़ा भाव कर्मभाव होता है,कर्म योग सबसे बडा योग होता है जिस देश मे गीता सबसे बड़ी प्रेरणास्‍प्रद पुस्तक है, जिसकी मिशाल पूरे जहां मे दी जाती है। कहा जाता है कि जिस देश के युवा गुणात्‍मक शिक्षा से ओतप्रोत होते है उस देश के विकास को कोई भी नही रोक सकता । आज भी परंपरा वही दोहराई जा रही है,बस परिस्‍थिती के नायको प्रतिनायको ने नए रूप अख्‍तियार कर लिए है। आज कृष्ण जन्माष्टमी मे हम बात करने जा रहे है श्री कृष्ण की शिक्षा के परिशीलन की ,जो आज भी युवा शक्ति की प्रेरणा है क्‍योकि
श्रीकृष्ण की सिखाई गई बातें युवाओं के लिए इस युग में भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी अर्जुन के लिए रहीं। कृष्ण के व्यवहारिक ज्ञान का सार आज भी आज के प्रतियोगी युग में भी सफलता की शाश्वत राह देता है,और आने वाली समस्याओं का निराकरण करता है।
कृष्ण हर मोर्चे पर क्रांतिकारी विचारों के धनी रहे हैं। उनका सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि वह किसी बंधी-बंधाई लीक पर नहीं चले। वक्त की जरूरत के हिसाब से उन्होंने अपनी भूमिका बदली और अर्जुन के सारथी तक बने। उन्हे किसी काम के छोटे बड़े होने से कोई फर्क नहीं पडता था। मित्रता अगर सीखनी है तो श्री कृष्ण से सीखे। कृष्ण ने पांडवों का साथ हर मुश्किल वक्त में देकर यह साबित कर दिया था कि दोस्त वही अच्छे होते हैं जो कठिन से कठिन परिस्थिति में आपका साथ देते हैं। दोस्ती में शर्तों के लिए कोई जगह नहीं है, इसलिए आपको भी ऐसे ही दोस्त अपने आस-पास रखने चाहिए जो हर मुश्किल परिस्थिति में आपका संबल बनें। आपको सन्मार्ग की और प्रेरणा दे,आपके लिए पथ प्रदर्शित करने के लिए तत्पर रहे। महाभारत के सबसे बड़े योद्धा अर्जुन ने ना केवल अपने गुरू से सीख लिया बल्कि वह अपने अनुभवों से हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहे। वे अपने सखा श्री कृष्ण से सीखने मे भी हिचकाए नही। उनका विश्‍वास शाश्‍वत रहा। यह सीख,यह विश्वास हर विद्‍यार्थी के लिए आवश्यक है।

विद्‍यार्थी को शिक्षक के अलावा अपनी गलतियों और असफलताओं से भी हमेशा सीखना चाहिए। पांडव अपनी हर गलती के लिए सीखे भी और श्री कृष्ण का अनुकरण भी किया।
अगर पांडवों के पास भगवान कृष्ण का मार्गदर्शन नही होता तो शायद ही पांडव युद्ध में जीत पाते। इसलिए किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए उचित व्‍युहरचना बनाना आवश्यक है। सफल होने के लिए ही मत जीओ,जीना है तो निरंतर सीखने के लिए जीओ।इसलिए ” कर्म करो और फल की इच्छा मत करो” सीख को कृष्‍ण्‍ा ने गीता में सिखाया है। ‘क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? किससे व्यर्थ में डरते हो? ‘कृष्‍ण से जुडे़ किसी भी कथानक को जाने तो ये बात स्पष्ट प्रक्षालित होगी कि इंसान को दूरदर्शी होना चाहिए और उसे परिस्थि‍ति का आकलन करना आना चाहिए। कृष्‍ण हमें यह भी सिखाते हैं कि मुसीबत के समय या सफलता न मिलने पर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। इसकी बजाय हार की वजहों को जानकर आगे बढ़ना चाहिए। समस्याओं का सामना करें. एक बार डर को पार कर लिया तो फि‍र जीत आपके कदमों में होगी।
प्रबंधन के सबसे बड़े गुरु हैं भगवान कृष्ण। उन्होंने अनुशासन में जीने , व्यर्थ चिंता न करने और भविष्य की बजाय वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने का मंत्र दिया।
भगवान कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की गरीबी देखी तो उसके घर पंहुचने से पहले ही उसकी झोंपड़ी की जगह महल बना दिया।उनके चरणो का स्वयं ने प्रक्षालन किया तभी तो कहते हैं कि दोस्‍ती कृष्‍ण जैसी करनी चा‍हिए और रिश्तों में कभी ओहदे को बीच में नहीं लाना चा‍हिए।
सीधे रास्‍ते से सब पाना आसान नहीं होता। खासतौर पर तब जब आपको विरोधि‍यों का पलड़ा भारी हो तो कूटनीति का रास्‍ता अपनाना चाहिए। इसलिए कृष्‍ण को सबसे बड़ा कूटनीतज्ञ भी माना जाता है।
आज युवा अपने जीवन मे नैराश्‍य को हावी न होने दे और अपने जीवन मे कृष्ण को उतार ले तो शायद हमारे देश के युवा ओजस्‍विता मे भारत की मिशाल होंगे।

-डॉ.भावना शर्मा

NewsQues India is Bilingual Indian daily e- Magazine. It is published in New Delhi by NewsQues India Group. The tagline of NewsQues India is " Read News, Ask Questions".

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *