वैश्विक मैत्री मिशन द्वारा धम्म चर्चा का आयोजन

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“बोधिसत्व बाबासाहेब अम्बेडकर आधुनिक भारत में धम्म के उन्नायक हैं।” – राजेन्द्र पाल गौतम (कैबिनेट मंत्री, दिल्ली सरकार)

राजस्थान बौद्ध विरासत एवं संस्कृति संवर्धन प्रतिष्ठान और बी ऑन लाइट फाउंडेशन के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित “मानव मात्र के लिए कल्याणकारी और मंगलकारी तथागत बुद्ध उपदेशित मैत्री भावना के वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर वर्तमान सन्दर्भों में पुनर्स्थापना और प्रचार – प्रसार” विषयक धम्म चर्चा में आज मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने भगवान बुद्ध से लेकर साहब कांशीराम तक के तमाम बहुजन महापुरुषों को नमन करते हुए भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता और सार्थकता की बात कही।

उन्होंने मानव कल्याण के उत्थान के लिए महाकारुणिक भगवान बुद्ध के धम्म के प्रचार – प्रसार पर बल देते हुए सृजनकारी संस्थाओं की स्थापना और नालन्दा – तक्षशिला सदृश ज्ञान परम्परा के विकास की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने बोधिसत्व बाबासाहेब अम्बेडकर के आंदोलन और मिशन के प्रति अगाध वात्सल्य और श्रद्धा समर्पित करते हुए कहा कि आज हम जितनी सरकारी सेवाओं में हैं, सम्मान का जीवन जी रहे हैं, कलेक्टर से लेकर एमपी – एमलए हैं सब बाबासाहेब के त्याग और संघर्ष की वजह से हैं। उनके द्वारा बताए गए धम्म के मार्ग को हम अनवरत आगे बढ़ाते रहेंगे।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर जन जन तक पालि को पंहुचाइए में संलग्न विद्वान डॉ. प्रफुल्ल गड़पाल ने पालि भाषा के विकास के साथ – साथ पुनः इस पूरी परम्परा को जीवित करने की ओर हमें प्रवृत्त किया। उन्होंने कहा कि त्रिपिटकों के प्रति श्रद्धा का भाव जागृत होना चाहिए और शब्दों के अर्थों को सुनिश्चित करते हुए भाव ग्रहण करना चाहिए।

कार्यक्रम में डॉ. विकास सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि व्यक्तिविशेष के चिंतन – मनन के आधार पर धम्म का निर्धारण नहीं किया जा सकता। धम्म वास्तव में मानने की अपेक्षा जानने की ओर प्रवृत्त करता है। जो केवल अनात्मवाद, अनीश्वरवाद जैसे शब्दों को पकड़कर बैठे हैं, वे अभी धम्म से कोसों दूर हैं। ये सब तो उन सर्वांग सुंदर तथागत की देशनाओं से निःसृत एकाध मोती हैं, पूरे कोश को छोड़कर केवल मोतियों तक सिमटे न रहें। उन्होंने राजस्थान के विशेष सन्दर्भों में बताते हुए बैराठ (भाब्रू) महाविहार के पुनर्विकसित करने की बात पर बल दिया।

राहुल राव ने पुरातात्विक स्थलों की यात्राओं तथा प्रक्रिया की ओर सभी का ध्यान खींचते हुए धम्म से जुड़ी प्रत्येक वस्तु के प्रति श्रद्धावान होने की बात कही।

बोधिधर्मन राहुल ने बुद्ध शासन को मजबूती प्रदान करने हेतु धम्म शिक्षण एवं अभ्यास केंद्रों, महाविहारों की स्थापना करने एवं उन्हें राष्ट्रीय एकता व अंतरराष्ट्रीय मैत्री के केंद्रों के रूप में पहचान की ओर सभी का ध्यान खींचा और धम्म को स्थापित करने के लिए एक सामाजिक प्रक्रिया के तहत पुनर्स्थापित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र के प्रसिद्ध बौद्ध चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. दामोदर मोरे ने तथा संचालन मुकेश मेहता ने किया। धम्म चर्चा में धन्यवाद ज्ञापन अविनाश बर्मन ने किया। इस धम्म चर्चा के समन्वयक उपासक मानस बौद्ध तथा संयोजक बोधिधर्मन राहुल ने किया था। यह धम्म चर्चा महाराष्ट्र की धम्म टीम द्वारा आयोजित की गई।

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