वर्षों के इंतजार के बाद आखिर हो गया श्रीराम मंदिर निर्माण का आगाज

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By Arvind Jangid

राममंदिर, वर्षों से किये जा रहे लंबे इंतजार के बाद श्रीराम मंदिर शिलान्यास की घड़ी आखिर नजदीक आ ही गई है। पांच अगस्त को होने वाले इस कार्यक्रम के कुछ दिनों बाद विश्व हिंदू परिषद, उसी तरह के जनजागरण की शुरुआत करेगा, जैसे आज से 31 वर्ष पूर्व 1989 में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए राम-शिला पूजन को लेकर हुआ था। मंदिर के नाम पर कोशिश हिंदुओं को जोड़ने की है। यह भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुश किस्मती है कि उनके कार्यकाल में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला दिया।

हालांकि, आपको मालूम ही है कि ऐसा केवल भाग्य के भरोसे बैठे रहकर नहीं हुआ। यदि यह कहा जाये तो गलत नहीं होगा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर न्यायपालिका में पूर्व की सरकारों ने सही ढंग से पैरवी नहीं की अथवा पैरवी करने में ढील की आदि अनेकों कमिया रही हो। इसीलिए इस मसले पर कोर्ट की कार्यवाही भी लगातार टलती रही। केंद्र में जब नरेंद्र मोदी की सरकार आयी तो उन्होंने भाजपा के घोषणा पत्र में जनता से किये गये ऐतिहासिक वादों के मुताबिक, जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण कराने के लिए अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए कमर कस ली और इसके लिये विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका में पूरा जोर लगाया। इसका परिणाम यह हुआ कि वह आज देश के लाखों करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं की कसौटी पर खरी उतरी है। यह केंद्र सरकार और यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि लगभग सात सौ वर्ष के लम्बे कठोर संघर्ष के बाद लोगों की मुराद पूरी हो रही है।

विपक्ष द्वारा समय-समय पर भारतीय जनता पार्टी पर कसे जाने वाले व्यंग्य कि, ‘श्रीराम मंदिर निर्माण भाजपा का चुनावी मुद्दा है और चुनाव के बाद वह इसे भूल जाती है’ तथा ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर नहीं बनाएंगे’ का इस बार उन्हें करारा जवाब भी मिलेगा कि भाजपा ने अपने द्वारा चुनाव के वक्त जनता से किये जाने वाले वादों को हर हाल में पूरा करके दिखाया है। भले ही इसके लिए उसे सदन में विपक्ष का काफी विरोध झेलना पड़ा हो।

देश के करोड़ों रामभक्तों ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर के शिलान्यास के मौके पर दीपावली की भांति दीये जलाकर इसे उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यदि यह कहा जाये कि भारतीय जनता पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान इसका लाभ मिलेगा तो गलत नहीं होगा और यदि श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार ने कोर्ट में जमकर पैरवी की तो उसे इसका लाभ मिलना भी गलत नहीं है।

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