मोटरवाहन अधिनियम जनता की सुरक्षा का चक्र

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विश्‍व के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश भारत मे मोटर वाहन अधिनियम में नए संशोधन सोशल मीडिया पर मज़ाक का विषय बन गए हैं, दण्ड राशि में अप्रत्याशित वृद्धि पर चुटकुले बनाए जा रहे हैं तब भारत की गुणात्‍मक शिक्षा पर प्रश्न उठ जाता है कि क्‍या हम सही नागरिक शिक्षा भी दे पाए है अपने नागरिको को। क्‍या हमारा व्‍यवस्‍था पर प्रश्‍न उठाना ही शेष रह गया है? नए संशोधनों से भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंकाएं अभिव्यक्त की जा रही हैं,पर क्‍या नियमों पर चलकर कोई जुर्माना देगा? क्‍यो हम हादसों की बदसूरती को भूलना चाहते है। समाचार पत्रो मे पढते है कि ट्रक चालक ने तेज़ी से ट्रक दौड़ाते हुए केवल गाने की कैसेट बदलते समय एक ऊँट गाड़ी पर ट्रक चढ़ा दिया। ऊँट समेत 5 पुरूष 3 महिलाएं और 4 बच्चों को कुचल दिया। मोबाइल पर गाने सुनते हुए टक्कर हुई । एक माँ की गोद उजड गई। ट्रोला चालक ने मोड़ पर मारूति 800 की गलत साइड में तेज गति से ओवरटेक करते समय एक परिवार को खत्‍म कर दिया।नई BMW कार को दिल्ली से जयपुर लाते हुए एक रईसजादे ने रोड़ कट पर मोटरसाइकिल पर सवार परिवार को कुचल दिया। सलमान खान को तो भूल ही गए होंगे। जयपुर में एक नमक से भरे हुए ओवरलोडिंग ट्रोले ने एक स्विफ़्ट में बैठे एक परिवार के ऊपर ट्रोला पलट दिया,शायद अब याद नही। बहरोड़ के पास तेज गति से सामने से डिवाइडर के ऊपर से कूदकर टाटा सफ़ारी में बैठे हुए सभी सवारो को कुचल दिया और कार को काटकर बुरी तरह बिगड़ी हुई लाशों को निकाला गया था। अंता बारां में मेले में एक ओवरलोड जीप पलटने से 11 लाशें सड़क पर फैल गई थीं। मोती डूंगरी जयपुर मे लगातार तीन मोत हुई,पर ये अधुरा दर्द क्‍या अखबार तक सीमित रह गया? किसी का सुहाग उजडा,किसी की गोद उजड गई, किसी की राखी अधुरी रह गई और किसी का कोई नामलेवा नही रहा। कोई जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो गया,क्‍या ये केवल समाचार पत्र के समाचार ही रहे जिन्हें आप चाय पीते समय पढ़ते रहे और फिर भूल गए। पुलिस को चालान करते देखा पर क्‍या कभी पुलिस को घायलों की सेवा करते, खून देते, अपने पैसों से दवा लाते हुए देखकर क्‍या उनके लिए दो शब्द प्रशंसा के कहे? घर के लोग तो कई बार बहुत बाद पहुँचते हैं। कभी अस्पताल में किसी पत्नी को, माँ को लाश से लिपटकर चीखते हुए देखा है। कभी पुलिस को उन्हें दिलासा देते रोते हुए छोटे बच्चों को खुद गोद में लेकर चुप कराते देखकर उनकी की गई सेवा पर गर्व किया। क्‍या पुलिस ही भ्रष्टाचार करती है। आप ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करना चाहते हैं,और बचकर निकलना चाहते है तो क्‍या यह भ्रष्टाचार नही है। बिना गाडी सीखे ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए, तो प्रक्रिया में सुधार आपको भ्रष्टाचार ही लगेगा न? आपको ट्रैफिक पुलिस पकड़ती है तो आप किसी प्रभावशाली व्यक्ति का फोन कराएंगे तो क्‍या यह भ्रष्टाचार नही है ? आप गलती करें और बच जाएं यह ईमानदारी है? आप सड़क इंजीनियरिंग में हो रहे अपराधों पर क्यों चुप रह जाते हैं? आपने कभी गटर के ढक्कनों को सड़क से 6 इंच ऊँचा या नीचा नहीं देखा? ब्रेकर की उंचाई पर प्रश्‍न किया? उसी समय ठेकेदार को पकडने की कोशिश की? सड़क पर पानी के बीच जब अचानक 2 फ़िट गहरा गड्ढा आ गया तब क्‍या आपने आवाज उठाई? लापरवाही मे हमारा मौन क्‍या अपराध नही, जब तक हम स्वयं नहीं सुधरेंगें तो कोई सुधार या कोई कानून हमारे लिए सुधार नहीं कर सकता। फैसला कीजिए रिश्वत नहीं देंगें।

कोई माँगेगा तो शिकायत करेंगे। जुर्माना राशि में इतनी अधिक वृद्धि न्यायसंगत है या नहीं इस पर न उलझे ,यह सोचे कि लापरवाही से किसी का सुहाग तो किसी की गोद तो किसी का परिवार उजड़ जाता है। यदि यातायात के नियमो के पालन से कोई परिवार बचता है तो नियम अच्‍छे है। अपराध की पुनरावृत्ति पर सजा का प्रावधान भी होना चाहिए। क्‍योकि अगर कोई जुर्माना हमे अपराध करने से रोकता है तो जुर्माना आवश्‍यक है। इसलिए दूसरों को कोसना छोड़िये और स्वयं ट्रैफिक नियमों का पालन कीजिए। नए प्रावधानो के अनुसार एक सितंबर 2019 से अगर आप किसी भी यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं तो आपको पहले की अपेक्षा करीब पांच से सौ गुणा तक जुर्माना भरना पड़ सकता है। नए वाहन एक्ट में नियमों के उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि इतनी ज्यादा रखी गई है कि अगर आप नियम तोड़ते हैं तो आपके जेब पर बहुत ही बुरा असर पड़ेगा। एक सितंबर से केंद्र सरकार की नई जुर्माना राशी मय सारणी निम्‍नांकित है –

अतः हेलमेट पहनिये,सीट बेल्‍ट बांधिए, सुरक्षित रहिये, यातायात के नियमो का पालन कीजिए।अपनी बेहूदा हरकत और बहस से आप पुलिस का विरोध कर सकते है “यमराज” का नही। इसलिए भ्रष्टाचार का आरोपण बहुत हुआ,खुद सही रहेंगे तो सब सही रहेंगे। जिंदगी ज्यादा कीमती है अतः यातायात के नियमों का पालन कीजिए ।

-डाॅ.भावना शर्मा
झुंझुनू,राजस्थान
bsharma.jjn@gmail.com

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