मालखेत बाबा की चोबीस कोस पदयात्रा

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सावन भादो का माह शेखावाटी के देशज त्‍योहारो के नाम होता है। सावन का महीने और लहरिया की रंगत सिणजारे के साथ, तीज की घेवर फीणी की मिठास ,नागपंचमी की पुजा,हरियाली मावस और पौधों के लिए अध्‍यात्‍म भरा रूझान,राखी भाई बहन के रिश्‍तो की मिठास,जन्‍माष्‍टमी मे कान्‍हा की मस्‍ती,गुगा नवमी का लौकिक त्‍योहार ,बच्‍छबारस और इसी बीच चौबीस कोस की परिक्रमा। जी हाँ आज बात करेंगे हम चौबीस कोसी परिक्रमा पदयात्रा एवं कुडं स्नान के कुछ मनमोहक दृश्य की। मालकेतु पर्वत में से सात धाराऐ 1सूर्यकुंड ,2नाग कुंड, 3खोरी कुंड ,4किरोड़ी, 5शाकंभरी( शुक्र धारा, सकराय)6 टपकेश्वर महादेव 7शोभावती, निकली है। लोहार्गल जहाँ पांडवों के सभी हथियार गल गए,प्राचीन सुर्य मंदिर, ब्रह्म क्षेत्र,महात्मा चेतन दास जी द्वारा बनाई गई बावड़ी,वनखंडी का मंदिर,शिव मंदिर,हनुमान मंदिर,पांडवों की गुफा और फिर चार सौ सीढ़िया चढने पर मालकेतुजी के दर्शन और फिर अमावस्या के दिन स्‍नान के साथ यात्रा का समापन,सचमुच बड़ा ही आनंद दायी आध्यात्मिक यात्रा जिसमे बस जीवन का उजास ही उजास । सबकुछ अद्भुत अद्वितीय । प्रति वर्ष भाद्रपद की गोगा नवमी से अमावस्या तक इन सातो धाराओं की पूजा की जाती है तथा सातों धाराओं के चारों ओर 24 कोसी परिक्रमा लगाई जाती है। कहा जाता है कि कोई भी श्रद्धालु अगर एक भी धारा में स्नान कर लेता है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।मालखेत बाबा की 24 कोसी फेरी लगाने के लिए ठाकुरजी की पालकी लेकर निकले संत महात्मा अपने झुण्ड सहित भजन कीर्तन करते हुए मालखेत बाबा के जयकारे लगाते हुए ठाकुरजी को लेकर आगे के रास्ते पर निकल पड़ते है। परिक्रमा में शामिल हजारों श्रद्धालु तिबारा, शोभावती नदी, टपकेश्वर, भगोवा, शाकंभरी किरोड़ी स्‍थान से गुजरते हुए पूरी शेखावाटी को भक्तिमय कर देते है
शेखावाटी के हर जगह धर्मशालाएं तथा अन्य सार्वजनिक स्थल श्रद्धालुओं से खचाखच भरे होते है। परिक्रमार्थी सुबह-शाम देर रात तक पैदल चलते हैं और दोपहर में आराम करते हैं। जहां रुकते हैं वहीं भजन-कीर्तन शुरू हो जाते हैं। इस दौरान थकने पर विश्राम करते श्रद्धालु तथा पहाड़ी पर चढ़ते श्रद्धालुओं की कतार सम्‍पूर्ण शेखावाटी को एक जोश मे भर देती है। आश्‍चर्य की बात है कि मालखेत बाबा की 24 कोसी परिक्रमा में महिलाओं की तादात कई गुणा ज्यादा होती है। फेरी करने वालो में छोटे बच्चों से लेकर बूढ़े-बुजुर्ग तक शामिल होते हैं। कई लोग तो चलने-फिरने में असमर्थ होते हैं, लेकिन उसके बावजूद पारिवारिक सदस्य या गांव गली के लोगों के साथ परिक्रमा करते है। मालखेत बाबा की फेरी का प्राकृतिक आनंद ही अलग होता है। यहां पहाड़ियों में पदयात्रा करने पर विशेष ऊर्जा मिलती है। कई जान-पहचान वाले इस परिक्रमा के दौरान ही मिलते हैं,जो आपसी सौहार्द की मिशाल बनता है। इस परिक्रमा में जो अपनत्व और स्नेह मिलता है वह अपने आप में अलग होता है। कई बार तो यहां दूर दराज की सहेलियां भी मिल जाती हैं जिनके साथ चार-पांच दिन बिताने का आनंद ही अलग होता है।
इस आनंद में कई बार समस्याएं भी आ जाती है हालाकिं प्रशासन भी चाकचौबंद होता है पर सुरम्‍य प्रकृति के सानिध्‍य मे कुछ सावधानी हमे भी रखनी चाहिए ।

सर्वप्रथम पहाड़ी जंगल के रास्ते में अपने दल के साथ रहें, अकेले पहाड़ियों में घूमने के लिए नहीं जाएं। पहाड़ी जीव-जंतु नुकसान पहुंचा सकते हैं। रात को सोते समय रोशनी में रहें तथा रात के समय शौच के लिए जाते समय टार्च साथ रखें अपने किसी साथी को भी साथ लेकर जाएं।
पहाड़ियों पर चढ़ने से सांस फूल जाती है। पहाड़ी रास्ते में थोड़ी भी परेशानी महसूस होने पर छाया में आराम करें। साथ ही कुछ आवश्यक दवाई भी साथ रखे। प्राथमिक उपचार की कुछ जानकारी भी अवश्य रखे।
परिक्रमा के दौरान शराब, धूम्रपान तम्बाकू के सेवन से बचना ही चाहिए । साथ ही अधिक समय पहले बना हुआ बासी भोजन नहीं खाना चाहिए। तली हुई भोजन सामग्री से बचने का प्रयास करें।
अपने साथ खर्चे से अधिक राशि नहीं रखें। महिलाएं आभूषण पहनकर परिक्रमा नहीं करें।
किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि महसूस होने पर तुरंत कंट्रोल कक्ष या पुलिस को सूचना दें। परिक्रमा के रास्ते में पहाड़ी क्षेत्र के ज्यादातर इलाके में मोबाइल टावर नहीं होने से संपर्क की परेशानी हो सकती है। इसलिए पहले से अपने ठहरने आदि के लिए स्थान निर्धारित कर के रखे। प्रशासन के साथ अगर पदयात्री भी अगर सावधानी रखे तो जीवन की सुखद स्‍मृति बनी रहती है।

– डॉ.भावना शर्मा
झुंझुनू,राजस्थान ।

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