बीजेपी के पाले में आये मायावती मे 15 बड़े नेता विपक्षी गठबंधन का यूँ गणित बिगड़ रहे अमित शाह

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लोक सभा चुनाव के मतदान संपन्न होने मे महज एक महिने से भी कम का समय बचा है लैकिन महागठबंधन से नेताओ की पार्टी छोड़ने का सिलसिला जारी है उत्तर प्रदेश में दो महीने पहले बहुजन समाज वादी पार्टी द्वारा समाज वादी पार्टी के साथ गठबंधन के एलान के बाद से यहां भी परिस्थितियां सही नही है इस दौरान मायावती के नेत्रत्व वाली पार्टी से नाता तोड़ 15 नेता बीजेपी मे शामिल हो गये थे।इनमे 11नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने बीएस पी का टिकट पर लोक सभा या विधान सभा का चुनाव लड़ा था।
11अप्रैल से शुरु होने वाला मतदान उत्तर प्रदेश में सभी सात चरणो मे उत्पन्न होगा लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस आरएल डी और समाजवादी पार्टी 28 नेताओ ने बीजेपी का दामन थाम लिया था इसमे माया वती की पार्टी बीएसपी का साथ छोड़ने वाले नेताओ की तादात अधिक है ।पार्टी छोड़ने वाले नेताओ मे से एक दबे हुए अंदाज में बताया की उन्होने अपने लोक सभा क्षेत्र से टिकट सुरक्षित रखने के लिए राजनीतिक पाला बदला है बीएसपी और समाजवादी पार्टी ने जनवरी में गठबंधन और पर औपचारिक मोहर लगा दी थी सीट समझौते के तहत कुल 80 लोक सभा सीट मे से माया वती की पार्टी 38और अखिलेश यादव की पार्टी ने 37सीटो पर चुनाव लड़ने का एलान किया था
बैसे बीजेपी का कहना है कि जो भी उनके लिये ज्यादा ववोट हासिल करेगा उनके लिये पार्टी का दरवाजा खुला हुआ है लेकिन मतदाता से पहले बीएस पी के खेमे से नेताओ को अपने पाले मे करना बीजेपी का यह एक गेम प्लान है इसके तहत वह बेहद खास वक्त में बीएसपी और सपा की मजबूत गड़ित को विगाड़ देना चाहती है।जिन बीएस पी नेताओ ने बीजेपी जॉइन किया है उनमे कई मंत्री और पार्टी विषेश स्थान रखते थे इनमे विजय प्रकाश जयसवाल भी शामिल हुए जायसवल शामिल है।जो 12मार्च को बिजेपी मे शामिल हुए। जयसवाल ने बीएस पी की टिकट पर 2014 में वाराणसी मे चुनाव लड़ा था।
जयसवाल ने बीजेपी के तत्कालीन पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ 60,569 वोट हासिल किये थे।लेकिन जैसे ही वाराणसी की सीट समझौते के तहत सपा के खाते में गई।उन्होंने पाला बदल लिया जायसवाल कहते हैं।मैं बीएसपी के बदौलत नहीं बल्कि लोकप्रियता के आधार पर वोट हासिल किये थे।मेरी मौजूदगी से वाराणसी को काफी मदद मिलेगी ।
आगरा से गूटियारी लाल दुबेस ने भी 12 मार्च को ही बीएसपी को अलविदा कहा था।और बीजेपी का दामन थामा था।दुबेस एक दलिद नेता है और बीएस पी से आगरा कैन्ट इलाक़े मे 2012 में विधायक रह चुके हैं।इसके अलावा बीएस पी के राष्ट्रीय प्रवक्ता उमेद प्रताप सिंह ने बीजेपी जॉइन कर लिया था।2007 में उमेद सिंह बिएसपी के टिकट पर प्रताप गढ़ जिले के राम पुर खास से चुनाव लड़े लेकिन हार गए थे।सिंह को बिएसपी का मेहनती नेता माना जाता रहा है लेकिन प्रतापगढ से टिकट मागने की उनकी जिद को पार्टी ने पूरा नहीं किया और उन्होंने बीजेपी का हाथ पकड़ लिया।
इस क्रम मे बिजेपी ने तीन बार बिधायक रहे छोटे लाल वर्मा और रामहेत भारती अपने पाले मे लाकर बिएस पी को तगड़ा झटका दे दिया है।

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