प्रो.योगेंद्र यादव, प्रो.आनंद कुमार द्वारा सी.बी. यादव द्वारा लिखित “देश के विमर्श” पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर लोकतंत्र की डगरः चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर वेबीनार।

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जनवादी लेखक संघ के बैनर तले राजस्थान विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर सी.बी.यादव द्वारा लिखित पुस्तक “देश के विमर्श” का वेबीनार के माध्यम से लोकार्पण हुआ एवं “लोकतंत्र के डगर:चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा में देश के प्रमुख सेफोलॉजिस्ट एवं स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव, जेएनयू के प्रोफेसर एवं प्रमुख समाजशास्त्री आनंद कुमार, जनवादी लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष एवं समाज शास्त्री प्रो.राजीव गुप्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं नारीवादी चिंतक अनीता भारती ने मुख्य रूप से अपने विचार प्रकट किए।

पुस्तक के लेखक सी.बी.यादव ने संपूर्ण पुस्तक में भारत और इंडिया के विभाजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में रूल्स ऑफ लॉ के स्थान पर प्रिविलेज ओफ लॉ का शासन स्थापित होना पुरानी जातिवादी वर्ण व्यवस्था के स्थान पर एक नई प्रकार की वर्ण व्यवस्था को जन्म दे रहा है, जिसका शिकार समाज का कमजोर वर्ग के साथ साथ मध्यमवर्ग भी हो रहा है। सूचनाओं के एकतरफा प्रवाह से लोगों की स्वस्थ विचार का निर्माण नहीं हो पा रहा है। समाज में स्वस्थ विचारों के निर्माण के अभाव में स्वस्थ लोकतंत्र की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। यह पुस्तक इसी दिशा में एक पहल है। योगेंद्र यादव ने बताया कि भारत के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में लोकतंत्र के भीतर तानाशाही प्रवृतियां विशेष रणनीतिक तरीके से प्रवेश कर चुकी है। लोकतंत्र के समक्ष इस चुनौती के दौर में एक ओर सत्ता का प्रतिरोध करना होगा,तो दूसरी ओर जनता से संवाद भी स्थापित करना होगा। पुस्तक देश के विमर्श के माध्यम से देश के समकालीन उभरते हुए मुद्दों पर किया गया जनसंवाद इस दिशा में एक सार्थक प्रयास है। प्रोफेसर आनंद कुमार ने पुस्तक में समकालीन चुनौतियों के साथ-साथ लेखक द्वारा प्रस्तुत किए गए व्यावहारिक समाधान की प्रशंसा करते हुए कहा कि निष्पक्ष एवं तटस्थ मूल्यांकन की जनता से जुड़ाव स्थापित करने का सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

उन्होंने सभी संवैधानिक संस्थाओं के कमजोर होने को लोकतंत्र के समक्ष सबसे बड़ा खतरा बताया। नारीवादी चिंतक अनीता भारती ने वेबीनार संबोधित करते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को राजनीति की मुख्यधारा में लाए बिना परिपक्व लोकतंत्र की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। उन्होंने समकालीन समय में ड्रग्स के नाम पर समाज में महिला विरोधी दृष्टिकोण बनाए जाने को लोकतंत्र के समक्ष एक बहुत बड़ा खतरा बताया। इस संदर्भ में मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। प्रोफेसर राजीव गुप्ता ने समाज में व्याप्त असमानता को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि समाजवादी दर्शन के माध्यम से कि समाज के कमजोर तबके को मुख्यधारा में लाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों के सशक्तिकरण के बिना सशक्त लोकतंत्र की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। कार्यक्रम का संचालन राजस्थान विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मनीष सिंह सिनसिनवार ने किया, एवं धन्यवाद ज्ञापन जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह व सचिव संदीप मील द्वारा किया गया।

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