पोषण माह : चुनौतिया एवं सम्‍भावनाए

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पोषण अभियान के प्रथम समूह में समग्र उत्कृष्टता श्रेणी में राजस्थान को प्रथम पुरस्कार मिला तब सितंबर माह 2019 मे द्वितीय पोषण माह की शुरूआत से और भी आशाए बलवती हो गई कि अवश्‍य ही राजस्‍थान मे कुछ सकारात्‍मक परिवर्तन होगा। बाल विकास विभाग की सचिव गायत्री राठौड़ व समेकित बाल विकास सेवाएं की निदेशक सुषमा अरोड़ा के अनुसार पिछले साल 8 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री ने आईसीडीएस विभाग के अधीन देशभर में पोषण अभियान शुरु किया था। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के झुंझुनू से राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत करते हुए देश में कुपोषण मिटाने की अपील की है। इस मौके पर उन्होंने कहा, ‘पोषण मिशन को याद कर लीजिए, क्‍योकि जनसंसाधन की गुणवत्ता ही देश के विकास का आधार होती है। उनका कहना था कि पोषण मिशन की सफलता के लिए जन जन की जागरूकता व सहयोग की आवश्यकता है वहीं स्थानीय नेताओं, पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समितियों, सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों, तमाम सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की समावेशी भागीदारी भी अपेक्षित है। इस भागीदारी को निभाने का एक खूबसूरत अवसर राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में सबको प्राप्त हुआ है। सितंबर 2018 को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया गया । आशा की गई कि वे अपनी ज़िम्मेदारी भारत को कुपोषण मुक्त बनाने में निभायेंगे।

तत्पश्चात महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश भर में 8 से 22 मार्च, 2019 तक ‘पोषण पखवाड़ा’ मनाया गया जिसकी शुरुआत 8 मार्च, 2019 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर की गई और अपेक्षा की गई यह जन आंदोलन के रूप में प्रवृत हो जिसका वैचारिक आधार सितंबर 2018 का पोषण माह रखा गया ।
इसकी गतिविधियों के समन्‍वय के लिये महिला और बाल विकास मंत्रालय नोडल मंत्रालय का कार्य करता है, इसी तरह राज्‍य/केंद्रशासित प्रदेशों के महिला और बाल विकास विभाग/समाज कल्‍याण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
पोषण गतिविधियों में पोषण मेला, सभी स्‍तरों पर पोषाहार रैली, प्रभात फेरी,स्‍कूलों में पोषाहार विषय पर सत्र का आयोजन, स्‍वयं सहायता समूहों की बैठकें, एनीमिया शिविर, बाल विकास निगरानी, आशा/आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नवजात शिशुओं के घर जाकर पोषण के लिये जागरूक करना, ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य, स्‍वच्‍छता तथा पोषाहार दिवस शामिल है।
मास मीडिया तथा सोशल मीडिया के माध्‍यम से गतिविधियाँ भी चलाया जाना, लोगों की अधिकतम पहुँच के लिये मीडिया सहयोगियों तथा स्‍वस्‍थ भारत प्रेरकों के दलों के माध्‍यम से एक सोशल मीडिया अभियान हैशटैग आदि काफी प्रयास किए गए है। 8 मार्च, 2018 को प्रधानमंत्री द्वारा झुंझुनू से एक असाधारण पहल राष्‍ट्रीय पोषण मिशन का राष्‍ट्रीय स्‍तर पर शुभारंभ किया गया था। तब भारत सरकार द्वारा तीन वर्ष के लिये 9046.17 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान करते हुए वित्तीय वर्ष 2017-18 से राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की गई थी। *राष्‍ट्रीय पोषण मिशन* एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण संबंधी हस्तक्षेपों की निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्ष्य निर्धारित करने तथा मार्गदर्शन का काम कर रही है। आज इसका लक्ष्य ठिगनापन, अल्पपोषण, रक्ताल्पता (छोटे बच्चों, महिलाओं एवं किशोरियों में) तथा जन्म के वक्त बच्चों में कम वज़न की समस्या में कमी लाना है।

आज आवश्यकता है कि हमे हर घर में पोषण का त्योहार मनाना चाहिए।हर बच्चे, किशोर- किशोरी, गर्भवती एवं धात्री महिला को निर्धारित पोषण सेवा हेतु तैयार करना है। आपका गांव तभी कुपोषण मुक्त होगा जब हम प्रयास करते है।

पोषण अभियान देश में नाटेपन, अल्पपोषण, खून की कमी (अनीमिया) तथा जन्म के वक्त कम वज़न वाले शिशुओं की संख्या में कमी लाने के लिये विभिन्न मंत्रालय और विभाग विगत वर्षों से सक्रिय हैं। इस दिशा में अपेक्षित परिणाम हासिल होना अभी शेष है। पोषण अभियान टेक्नोलोजी की मदद से जन-जन के बेहतर आहार और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लायेगा। इस योजना में विभिन्न मंत्रालय एवं विभाग तालमेल बैठाते हुए अपना भरपूर सहयोग प्रदान करेंगे। इस अभियान को सफल बनाने के लिये पंचायत स्तर तक एक मजबूत साझेदारी की आवश्यकता है। इस दिशा में पंचायत प्रतिनिधि अपनी अहम भूमिका निभायें तथा कुपोषण को दूर करते हुए एक मज़बूत देश की नींव रखें।

पोषण अभियान गर्भवती महिलाएं,धात्री महिलाएं तथा नवजात शिशु,किशोरियां और बच्चो के लिए विशेष होता है।
पोषण अभियान मे अभिप्रेरक के रूप मे पंचायत प्रतिनिधि की भूमिका, पंचायत प्रतिनिधि, एक जनप्रतिनिधि के नाते, निम्न लाभार्थियों को सही पोषण और सकारात्मक व्यवहारों को संगोष्ठी या नुक्‍कड नाटक या कार्यशाला के माध्‍यम से अभिप्रेत कर सकते है,उन्‍हे उन्‍नत पोषण के लिए प्रोत्‍साहित कर सकते है। यथा_

*गर्भवती महिलाओ के अपेक्षित कर्तव्‍य* गर्भवती महिलाओ को रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पोषक आहार लेना चाहिए ।
पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खाना चाहिए ।
आई.एफ.ए. की एक लाल गोली रोज़ाना, चौथे महीने से 180 दिन तक लेना चाहिए ।
कैल्शियम की निर्धारित खुराक लेना चाहिए ।
एक एल्बेण्डाजोल की गोली दूसरी तिमाही में लेना चाहिए ।
ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पीना चाहिए।
प्रसव से पहले कम से कम चार ए.एन.सी. जांच ए.एन.एम. दीदी या डॉक्टर से ज़रूर करवाना चाहिए।
नज़दीकी अस्पताल या चिकित्सा केन्द्र पर ही अपना प्रसव कराना चाहिए।
व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।
खाना खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोना चाहिए।
शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोना चाहिए।
हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करना चाहिए।
*धात्री महिलाएं के अपेक्षित कर्तव्य* ये महिलाए भी रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पोषक आहार लें।
पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खायें।
प्रसव से लेकर 6 महीने तक (180 दिन) रोज़ाना आई.एफ.ए. की एक लाल गोली लें।
कैल्शियम की निर्धारित खुराक लें ।ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पीयें।
नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू करायें तथा शिशु को अपना पहला पीला गाढ़ा दूध पिलायें। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चे का पहला टीका होता है।
शिशु को शुरुआती 6 महीने सिर्फ अपना दूध ही पिलायें और ऊपर से कुछ न दें।
व्यक्तिगत और अपने बच्चे की स्वच्छता का ध्यान रखें।
खाना बनाने तथा खाना खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोयें।
बच्चे का शौच निपटाने के बाद और अपने शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोयें।
बच्चे का शौच निपटान और अपने शौच के लिए हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें।
बच्चे
महीने पूरे होने पर मां के दूध के साथ ऊपरी आहार शुरू करें।
रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पोषक आहार दें।
मसला हुआ और गाढ़ा पौष्टिक ऊपरी आहार दें।
पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खायें।
आई.एफ.ए. और विटामिन-ए की निर्धारित खुराक दिलवायें।
पेट के कीड़ों से बचने के लिये 12 से 24 महीने के बच्चे को एल्बेण्डाज़ोल की आधी गोली तथा 24 से 59 महीने के बच्चे को एक गोली साल में दो बार आंगनवाड़ी केन्द्र पर दिलवायें ।
आंगनवाड़ी केन्द्र पर नियमित रूप से लेकर जायें तथा उसका वज़न अवश्य करवायें।
बौद्धिक विकास के लिये पौष्टिक आहार उसकी उम्र के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, ए.एन.एम. या डॉक्टर द्वारा बतायी गयी मात्रा के अनुसार दें।
5 साल की उम्र तक सूची अनुसार सभी टीके नियमित रूप से ज़रूर लगवायें।
व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वच्छता की आदत डलवायें।
ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पिलायें।
खाना खाने और खिलाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोयें।
शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोयें।
उम्र अनुसार बच्चे के साथ खेलें एवं बातचीत करें।
बच्चे के शौच का निपटान हमेशा शौचालय में करें।
*किशोरियां भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो*
किशोरियों भी रोज़ाना आयरन और विटामिन युक्त तरह-तरह के पौष्टिक आहार ज़रूर खाए।जिससे माहवारी के दौरान रक्त स्राव से होने वाली आयरन की कमी पूरी कर उसका संपूर्ण विकास हो।
पौष्टिकीकृत दूध और तेल तथा आयोडीन युक्त नमक खायें।
आई.एफ.ए. की एक नीली गोली हफ्ते में एक बार लें।
व्यक्तिगत साफ-सफाई और माहवारी स्वच्छता का ध्यान रखें।
पेट के कीड़ों से बचने के लिये एल्बेण्डाजोल की एक गोली साल में दो बार लें।
ऊंचे स्थान पर ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी ही पीयें।
खाना खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोयें।
शौच के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोयें।
हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें।
*पंचायत प्रतिनिधि के अपेक्षित कार्य*
गांव स्तर पर लोगों को सही पोषण के बारे में जागरूक करें।
सुनिश्चित करें कि गांव की हर लड़की का विवाह 18 वर्ष की आयु से कम में न हो।
सुनिश्चित करें कि गांव की हर गर्भवती महिला का प्रसव अस्पताल या चिकित्सा केन्द्र पर हो।
सुनिश्चित करें कि गांव का कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न करे तथा गांव का प्रत्येक व्यक्ति शौच के लिये शौचालय का इस्तेमाल करे ।
गांव के लोगों को घरों में पेड़ और साग-सब्ज़ियां लगाने के लिये प्रोत्साहित करें ताकि परिवार को हरी साग-सब्जियां मिल सकें।
सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें।
ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की बैठक का नियमित आयोजन करें व इसमे सबकी उपस्थिति सुनिश्चित करे।इसके लिए उपस्थिति पंजिका का संधारण करे।
*आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के अपेक्षित कार्य*
देखभालकर्ता को समुचित पोषण संबंधी परामर्श नियमित रूप से देती रहें।
बच्चों का नियमित और पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें।
बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास की निगरानी करें।
गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की निगरानी हेतु नियमित गृह भ्रमण करें।
बच्चों का नियमित रूप से वज़न करें तथा एम.सी.पी. कार्ड में दर्ज करें। लाल घेरे में होते ही निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर रेफर करें।
*आशा कार्यकर्ता के अपेक्षित कार्य*
गर्भवती महिला को संस्थान में प्रसव कराने के लिये प्रोत्साहित करें तथा ए.एन.सी. जांच सुनिश्चित करें।
नवजात शिशु की देखभाल और धात्री महिला की निगरानी हेतु 8-9 बार गृह भ्रमण करें।
अतिकुपोषित बच्चों और कम वजन के बच्चों की निगरानी हेतु हर महीने गृह भ्रमण करें।
बच्चों का नियमित और पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें।
समय समय पर गाँव गाँव ढाणी ढाणी अभियान मे लोगो को इस जागृति अभियान से जोडे।
*स्कूल प्रबंधन समिति के अपेक्षित कार्य* किशोर–किशोरियों को अनीमिया से बचाव के प्रति सचेत करें,उन्‍हे उचित खानपान के बारे मे बताए।बच्चों को साफ-सफाई और स्वच्छता के प्रति जागरूक और जवाबदेह बनायें। स्वच्छता अभियान मे एक कडी के रूप मे जोडे।
सामुदायिक रेडियो स्टेशन
पोषण के विभिन्न पहलुओं से संबंधित कार्यक्रमों को तैयार कर उसे प्रसारित करें।
साफ-सफाई और स्वच्छता के प्रति जागरुकता फैलायें।
कृषि से उपलब्ध स्थानीय पोषक आहारों के बारे में जागरुकता फैलायें।
खाना बनाने की स्थानीय विधि, भोजन की कैलोरी में वृद्धि तथा पौष्टिक आहार पर कार्यक्रम आयोजित करें।
इन विषयो से संबधित कार्यक्रम आयोजित करे।
आज समस्या व्यवहार मे जनता की सहभागिता लेने की है और पर्याप्त इच्‍छाशक्‍ति प्रशासन की हो तो शायद पोषण अभियान भी धरातल में साकार हो सके।

-डॉ.भावना शर्मा
झुंझुनू,राजस्थान
bsharma.Jjn@gmail.com

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