दिल्ली सरकार के कॉलेजों में 11 महीने से नहीं है गवर्निंग बॉडी

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नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम ने दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल व शिक्षा मंत्री श्री मनीष सिसोदिया को पत्र लिखकर यह मांग की है कि दिल्ली सरकार द्वारा पोषित 28 कॉलेजों में जल्द से जल्द गवर्निंग बॉडी के सदस्यों के नाम भेजने की मांग की है ताकि पिछले 11 महीने से गवर्निंग बॉडी के ना रहने से शैक्षिक व गैर-शैक्षिक पदों पर नियुक्ति ना होने से कॉलेजों का कार्य प्रभावित हो रहा है। इन कॉलेजों में 20 ऐसे कॉलेज है जिनमें स्थायी प्रिंसिपल नहीं है । स्थायी प्रिंसिपलों के ना होने से स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया रुकी हुई है।उन्होंने बताया है कि इन कॉलेजों में 11 महीने से ट्रेंकेटिड गवर्निंग कार्य कर रही है,कुछ में गवर्निंग बॉडी ही नहीं है।

फोरम के महासचिव व पूर्व विद्वत परिषद सदस्य प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन’ ने बताया है कि दिल्ली सरकार के पोषित 28 कॉलेजों में 12 कॉलेजों को शत प्रतिशत अनुदान दिया जाता है बाकी 16 कॉलेजों को सरकार की ओर से 5 फीसदी अनुदान दिया जाता है।इन कॉलेजों में पिछले दो साल से पांच साल व अधिक से प्रिंसिपलों के पद खाली पड़े हुए हैं। प्रिंसिपलों के पदों व सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति किए जाने को लेकर विज्ञापन निकाले जा रहे हैं।इन कॉलेजों में पिछले 11 महीनों से गवर्निंग बॉडी नहीं है। 7 मार्च 2019 को इन कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है ।दिल्ली सरकार की ओर से कॉलेजों में बनने वाली गवर्निंग बॉडी के नामों को दिल्ली विश्वविद्यालय को कई बार भेजा गया लेकिन कार्यकारी परिषद ने उसे पास कर कॉलेजों को नहीं भेजा ,जिससे पिछले 11 महीनों से इन कॉलेजों में ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी कार्य कर रही है।

प्रोफेसर सुमन का कहना है कि 16 फरवरी को पुनः आप ही की सरकार बन चुकी है इसलिए कॉलेजों में बनने वाली गवर्निंग बॉडी के सदस्यों के नाम जल्द से जल्द दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को भिजवाए जाए ताकि कार्यकारी परिषद की बैठक में नामों की संस्तुति कर कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी बन सके।उन्होंने बताया है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में लंबे समय से प्रिंसिपल पदों को नहीं भरा गया है।कुछ कॉलेजों में 5 साल और उससे अधिक समय तक कार्यवाहक/ओएसडी के रूप में कार्य करते हुए हो गए हैं जबकि यूजीसी रेगुलेशन के अंतर्गत स्थायी प्रिंसिपल का कार्यकाल 5 साल का होता है मगर ये प्रिंसिपल उससे ज्यादा समय तक अपने पदों पर बने हुए हैं मगर उनकी स्थायी नियुक्ति आज तक नहीं की गई। जबकि अधिकांश कॉलेजों ने अपने यहां प्रिंसिपल पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाले जा चुके हैं लेकिन गवर्निंग बॉडी के ना होने के कारण नियुक्ति नहीं हुई।

प्रो. सुमन के अनुसार प्रिंसिपलों के पदों पर स्थायी नियुक्ति न होने से इन कॉलेजों में सहायक प्रोफ़ेसर की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है जबकि गैर शैक्षिक पदों पर नियुक्ति व पदोन्नति की जा रही है। इसी तरह से लंबे समय से प्रिंसिपल पदों पर नियुक्तियां ना होने से 20 से अधिक कॉलेजों के प्रिंसिपलों के पद खाली पड़े हुए हैं ।इन कॉलेजों में सबसे ज्यादा दिल्ली सरकार के कॉलेज है जहां पिछले 11महीनों से बिना गवर्निंग बॉडी के चल रहे हैं हालांकि इनमें से कुछ में काम चलाऊ ट्रेंकेटिड गवर्निग बॉडी है,कुछ में तो दोनों ही नहीं है।उन्होंने बताया है कि इसी तरह इन कॉलेजों में सहायक प्रोफेसरों की पदोन्नति भी 10 से 15 सालों से नहीं हुई है जिसके कारण उन शिक्षकों को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है।

दिल्ली सरकार के अंतर्गत 28 कॉलेज आते हैं। इन कॉलेजों में नहीं है स्थायी प्रिंसिपल–श्री अरबिंदो कॉलेज, श्री अरबिंदो कॉलेज(सांध्य) मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज(सांध्य) सत्यवती कॉलेज, सत्यवती कॉलेज (सांध्य ),भगतसिंह कॉलेज ,भगतसिंह कॉलेज(सांध्य) श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, विवेकानंद कॉलेज, श्रद्धानंद कॉलेज, भारती कॉलेज, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉलेज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, राजधानी कॉलेज, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, (कोर्ट में विचाराधीन है) गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज आदि है।इसके अतिरिक्त कालिंदी कॉलेज की प्रिंसिपल के कुलपति बनने पर पद खाली है।उन्होंने बताया है कि जिन कॉलेजों में प्रिंसिपल पदों पर इंटरव्यू नहीं हुए उन विज्ञापनों की समय सीमा समाप्त हो गई। इन कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के ना होने से प्रिंसिपल पदों पर नियुक्तियां ना हो पाई और न ही सहायक प्रोफेसर के पद निकाले गए।

उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया है कि दिल्ली सरकार के कॉलेजों में प्रिंसिपल, सहायक प्रोफेसरों के पदों के अतिरिक्त लाइब्रेरियन व गैर शैक्षिक पदों पर भी लंबे समय से नियुक्ति ना होने से सैंकड़ों पद खाली पड़े हैं।इसके अलावा यूजीसी द्वारा सेकेंड ट्रांच के पदों पर नियुक्ति की जानी है, कुछ कॉलेजों ने विज्ञापन निकाल दिए हैं कुछ के निकलने बाकी है।इसलिए गवर्निंग बॉडी होने पर ही इन पदों पर स्थायी नियुक्ति की जा सकती है।

दिल्ली सरकार के कॉलेजों में 11 महीनों से नहीं गवर्निंग बॉडी–प्रो. सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में 7 मार्च 2019 से गवर्निंग बॉडी नहीं है।डीयू की सुप्रीम बॉडी ईसी में दो बार गवर्निंग बॉडी का मामला आ चुका है लेकिन सरकार और विश्वविद्यालय के बीच खींचतान के कारण पिछले 11 महीनों से इन कॉलेजों में सरकार की गवर्निंग बॉडी नहीं है। उनका कहना है कि दिल्ली के चुनाव के बाद अब सरकार बन चुकी है।सरकार उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के सदस्यों के नाम भेजे जाए ताकि प्रिंसिपलों के पदों पर स्थायी नियुक्ति व सहायक प्रोफेसरों के पदों को भरा जा सके।

– हंसराज सुमन

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