दिल्ली सरकार के इन कॉलेजों में पिछले तीन महीने से नहीं मिली है शिक्षकों/कर्मचारियों को सैलरी।

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आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन और दिल्ली नॉन टीचिंग स्टाफ एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों की ग्रांट रिलीज कराने की मांग को लेकर एक प्रतिनिधि मंडल प्रभारी प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन’ व अध्यक्ष डॉ. आशा जस्सल के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया से उनके कार्यालय में मिला।संगठन की ओर से उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

आप के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के प्रभारी प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन’ ने उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया को बताया कि दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में पिछले तीन महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन व ग्रांट रिलीज समय पर ना मिलने से उनके सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है।वहीं दूसरी ओर कोविड-19 महामारी के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।पिछले एक वर्ष से इन्हें कभी भी समय पर ग्रांट नहीं मिली।जो ग्रांट इन्हें मिली है उसमें शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन का ही भुगतान हो पाता है बाकी शिक्षकों की पेंशन, मेडिकल बिल ,सातवें वेतन आयोग के एरियर आदि के बिल पेंडिंग है।

प्रोफेसर सुमन ने श्री सिसोदिया को यह भी बताया कि 12 कॉलेजों को दिल्ली सरकार की ओर से जो ग्रांट दी जा रही है उसमें मात्र शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान बमुश्किल हो पाता है।इन कॉलेजों में गेस्ट टीचर्स, कन्ट्रक्चुल कर्मचारी भी है जिन्हें 12 से 15 हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं लेकिन पिछले तीन महीने से सैलरी न मिलने से दिल्ली जैसे महानगर और दूसरी तरफ कोविड-19 जैसी बीमारी में भी ये कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।शिक्षकों/कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ कॉलेजों ने स्टूडेंट फंड से शिक्षकों और कर्मचारियों की सैलरी का भुगतान इसलिए करना पड़ा क्योंकि कोविड महामारी के चलते सैलरी के बिना तनाव में थे।इससे उन्हें आंशिक रूप से राहत मिली है लेकिन वे अभी भी परेशान है। सरकार को उनकी परिस्थितियों को देखते हुए जल्द से जल्द ग्रांट रिलीज कर देनी चाहिए ताकि सौहार्दपूर्ण जीवन व्यतीत कर सके।

प्रतिनिधि मंडल की बात सुनने के बाद उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया ने 2013 से लेकर 2019 -20 तक जो सैलरी का खर्च बढ़ा है उसका आंकड़ा दिया।उन्होंने बताया है दिल्ली सरकार के कॉलेजों को 2012–13 में 121करोड़ दिए जाते थे वहीं 2019–20 में यह ग्रांट बढ़कर 242 करोड़ हो गई ।उनका यह भी कहना था कि कॉलेजों ने अपने यहां स्वीकृत पदों से ज्यादा शिक्षकों / कर्मचारियों की नियुक्ति की हुई है।उसके बावजूद दिल्ली सरकार के कॉलेजों में उनकी सरकार के प्रतिनिधियों को चेयरमैन नहीं बनने दिया जा रहा है।उनका कहना था कि जो अनियमितताएं व अवैध नियुक्तियां ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी के समय हुई है जिसमे 5 कॉलेजों के प्राचार्य भी है जो दिल्ली सरकार की गवर्निंग बॉडी नहीं बनने दे रहे हैं।

उन्होंने कहा है कि ग्रांट रोकने के पीछे सरकार की गवर्निंग बॉडी ना बनने देना तथा ग्रांट डबल करने के बावजूद वेतन नहीं दिया जा रहा है, सरकार उन कारणों का जल्द पता लगाएगी और जनता के सामने पर्दाफाश करेगी।हमारे कॉलेज और हमारी गवर्निंग बॉडी को रोकना गैर कानूनी और असंवैधानिक बताया।यह इतिहास में पहली बार विश्वविद्यालय प्रशासन की शह पर हो रहा है इसकी जबाबदेही कुलपति और प्रशासन की है।

उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कॉलेजों में वित्त को लेकर पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।इसके लिए दिल्ली सरकार ने ऑडिट के लिए सीएजी ( CAG ) का पैनल मंगवाया है और ऑडिट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वे इस मुद्दे पर बहुत ही संवेदनशील है और शिक्षकों/कर्मचारियों की सैलरी को लेकर काफी गम्भीर है और उन्होंने डीटीए को आश्वासन दिया है कि आने वाले समय में इस मुलाकात का सकारात्मक परिणाम निकलेगा।उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गवर्निंग बॉडी ना बनाने पर नाराजगी व्यक्त की।क्योंकि कॉलेज नहीं चाहते है कि कॉलेजों में हो रही अनियमितताओं और तथाकथित भ्र्ष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए दिल्ली सरकार की गवर्निंग बॉडी नहीं बनने दे रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार फंड की ऑडिट के साथ-साथ शिक्षकों के वर्कलोड़ का भी ऑडिट कराने जा रही है क्योंकि कॉलेजों ने अपने स्वीकृत पदों से ज्यादा पदों पर नियुक्ति की हुई है।

दिल्ली नॉन टीचिंग स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री केदारनाथ ने भी उपमुख्यमंत्री को कर्मचारियों के पदों को प्रिंसिपलों द्वारा ना भरने पर चिंता जताई और कहा कि पिछले एक दशक से कर्मचारियों की नियुक्ति व पदोन्नति ना होने से इन पदों पर लोगों को कन्ट्रक्चुल लगाया हुआ है।उन्होंने बताया कि यूजीसी इन पदों को भरने के कई बार निर्देश जारी कर चुकी है लेकिन गवर्निंग बॉडी के न रहने पर नियुक्ति नहीं हो सकी, उन्होंने इन पदों को जल्द स्थायी भरने की मांग की।साथ ही उन्होंने यूजीसी द्वारा दिए गए ओबीसी कोटे के सेकेंड ट्रांच के पदों को भरने की मांग की।

प्रतिनिधि मंडल में डॉ. नरेंद्र पांडेय, डॉ. मनोज कुमार सिंह ,डॉ. राजेश राव ,डॉ. नागेंद्र सिंह आदि ने भी उपमुख्यमंत्री से दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों की ग्रांट जल्द से जल्द रिलीज करने की मांग की है।

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