डीयू में कोरोना की मार सबसे ज्यादा गेस्ट टीचर्स पर

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दिल्ली विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध सभी शिक्षण संस्थान/ कॉलेजों को कोरोना की वजह से 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है।इस बंद की मार का सबसे ज्यादा असर लगभग 4000 हजार उन शिक्षकों पर पड़ा है जो नियमित कॉलेजों ,नॉन कॉलेजिएट वीमेंस एजुकेशन बोर्ड,एसओएल, इग्नू आदि में गेस्ट टीचर्स (अतिथि शिक्षक ) के रूप में पढ़ा रहे हैं। जिनकी मार्च महीने में कॉलेजों में तीन या चार ही क्लासेज हुई ,उसके बाद 7 मार्च से 14 मार्च तक कॉलेजों को वेकेशन ब्रेक की वजह से कक्षाएं नहीं लगी। बीच में ही सरकार व डीयू द्वारा सर्कुलर जारी किया गया जिससे कोरोना की वजह से कॉलेजों को बंद कर दिया गया।इन अतिथि शिक्षकों को प्रति लेक्चर के हिसाब से भुगतान किया जाता है।

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन व दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व एकेडेमिक काउंसिल सदस्य प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन ‘ ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्तमान में लगभग 4000 हजार अतिथि शिक्षक विभिन्न शिक्षण संस्थानों /कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं। इनमें एसओएल जहां शनिवार/ रविवार कक्षाएं लगती है लगभग 2000 शिक्षक पर्सनल कॉन्ट्रेक्ट प्रोग्राम के माध्यम है अध्यापन कार्य करते हैं, नॉन कॉलेजिएट वीमेंस एजुकेशन बोर्ड़ इसके 26 शिक्षण केंद्र है शनिवार/रविवार कक्षाएं लगती है,लगभग–1150 विभिन्न शिक्षण केंद्रों पर शिक्षक पढ़ा रहे हैं। नियमित कॉलेजों (रेगुलर कॉलेज ) में 600 शिक्षक है।इसके अतिरिक्त डीयू के कुछ कॉलेजों में इग्नू की पर्सनल कॉन्ट्रेक्ट प्रोग्राम( पीसीपी ) यहां पर भी 100 से अधिक गेस्ट टीचर्स के रूप में डीयू के शोधार्थी /पीएचडी धारक कक्षाएं लेते हैं लेकिन कोरोना की वजह से 31मार्च तक शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में इस शैक्षिक सत्र से नॉन कॉलेजिएट और एसओएल में सेमेस्टर सिस्टम लागू कर दिया गया है।अभी तक पहले सेमेस्टर में दी गई परीक्षा का परिणाम अभी तक घोषित नहीं हुआ है और न ही अभी तक आधा सलेब्स ही पूरा हुआ है ऐसी स्थिति में उन छात्रों/छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।इसलिए 31 मार्च के बाद शाम को कक्षाएं लगाई जाए ताकि छात्राओं का पाठ्यक्रम पूरा किया जा सके। 8 मार्च से जो कक्षाएं लगी हुई उसे बीच में कोरोना की वजह से रोक दिया गया।
प्रोफेसर सुमन के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे स्थायी ,एडहॉक, टेम्परेरी शिक्षकों को तो मार्च माह का वेतन मिल जाएगा लेकिन जो गेस्ट टीचर्स प्रति लेक्चर के हिसाब से पढ़ा रहे हैं उन्हें बिना क्लास लिए किसी तरह का भुगतान विश्वविद्यालय/कॉलेज की ओर से नहीं किया जाएगा क्योंकि जिस दिन उनके पीरियड लगे हुए हैं उन्हें उसी दिन की क्लास की उपस्थिति लगानी पड़ती है,उसी उपस्थिति के आधार पर प्रति लेक्चर के हिसाब से उन्हें भुगतान किया जाता है।लेकिन इस माह तीन या चार क्लासेज के बाद से कोई क्लास नहीं लगी है इसलिए किसी तरह का भुगतान नहीं होगा।

प्रोफेसर सुमन ने गेस्ट टीचर्स को अतिरिक्त कक्षाएं देने व उन्हें एक मुश्त भुगतान किया जाए ताकि अपनी रोजमर्रा के खर्चो को चला सके क्योंकि उनकी एकमात्र रोजी रोटी का साधन यही है।केंद्र सरकार व दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध किया है कि उन्हें एक मुश्त भुगतान किया जाए और इनके सलेब्स को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कक्षाओं का प्रबंध किया जाए साथ ही सेमेस्टर परीक्षाओं की तिथि एक महीने आगे बढ़ाई जाए ताकि शिक्षकों द्वारा पाठ्यक्रम पूरा कराया जा सके।

– हंसराज ‘सुमन'(चेयरमैन फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस,
पूर्व सदस्य – डीयू एसी)

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