जन विरोधी नई शिक्षा नीति के खिलाफ 5 सितम्बर शिक्षक दिवस से शुरू होगा सघन जन अभियान

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शिक्षा बचाओ आंदोलन (SBA),राजस्थान
”शिक्षा बचाओ आंदोलन साझा मंच का गठन’

‘जन विरोधी नई शिक्षा नीति के खिलाफ 5 सितम्बर शिक्षक दिवस से शुरू होगा सघन जन अभियान’

‘शिक्षा बचाओ-देश बचाओ’ के उद्देश्य के लिए संघर्षशील शिक्षक, विद्यार्थी एवं नागरिक संगठनों के संयुक्त राष्ट्रीय मंच-जॉइंट फोरम फॉर मूवमेंट ऑन एड्यूकेशन-जे एफ एम ई के आह्वान पर आज डॉ रमेश बैरवा की पहल पर गूगल मीट पर ऑनलाइन मीटिंग कर राजस्थान में भी ‘शिक्षा बचाओ आंदोलन के नाम से राज्य स्तरीय साझा मंच का गठन किया गया।

मीटिंग में राजस्थान शिक्षक संघ से प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग,प्रदेश महामंत्री उपेंद्र शर्मा एवं प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत कुमार खराड़ी,राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील से पूनमा राम विश्नोई,
छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एस एफ आई) से प्रदेश अध्यक्ष सुभाष जाखड़ एवं राज्य सचिव सोनू कुमार जिलोवा,डॉ.रमेश बैरवा, रूक्टा केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ.भरत मीणा,डॉ सुमेरसिंह, डॉ मल्लूराम मीणा, डॉ अतुल जोशी,अशोक लोदवाल, दिनेश यादव, छोटेलाल बलाई सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं विद्यार्थी संगठन के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। शिक्षा बचाओ आंदोलन के मंच को राजस्थान में सक्रिय करने के लिए शिक्षा से जुड़े शिक्षक, विद्यार्थी एवं अन्य नागरिक संगठन,बुद्विजीवी एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़ कर एसबीए को और व्यापक एवं मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया। मीटिंग की अध्यक्षता रूक्टा के पूर्व महामन्त्री एवं एआईफुकटो के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.घासीराम चौधरी ने की। मीटिंग का संचालन महावीर सिहाग एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ भरत मीणा ने किया।

मीटिंग में प्रतिभागियों ने नई शिक्षा नीति को शिक्षक विरोधी,छात्र विरोधी,जन विरोधी एवं राज्य सरकार विरोधी बताया।नई शिक्षा नीति एक्सेस,इक्विटी,एक्सीलेंस, अफोर्डेबलिटी एवं अकाउंटेबलिटी तथा समावेशी शिक्षा जैसे आकर्षक लक्ष्यों के बहाने,शब्दाडम्बर की चाशनी में डुबोकर बड़ी चतुराई से पेश की गई है। शिक्षा पर जीडीपी का खर्च वर्तमान में जो करीब 3 प्रतिशत है,इसे बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने का वादा किया गया है,जो कतई मुमकिन नहीं है। क्योंकि ‘अच्छे दिन’ लाने का वादा कर सत्ता में आई मोदी सरकार नीजिकरण की आक्रामक बाजारवादी नीतियों के जरिये शिक्षा सहित लोक कल्याण की नीतियों को बुरी तरह से कमजोर करने पर आमादा है। एनईपी अंततः शिक्षा का व्यावसायीकरण,केन्द्रीयकरण एवं भारतीयकरण के नाम साम्प्रदायिकरण को बढ़ावा देगी। एनईपी सामाजिक एवं आर्थिक विषमता को बढ़ाकर समतामूलक,समावेशी शिक्षा के संवैधानिक लक्ष्य को कमजोर करेगी। एनईपी का सबसे बुरा असर दलित,आदिवासी,महिला एवं अल्पसंख्यक जैसे वंचित एवं पिछड़े तबके तथा आमजन पर पड़ेगा। संसद की घोर अनदेखी करके एनईपी को मोदी केबिनेट के जरिये मनमाने तरीके से देश की जनता पर थोपा गया है। एआइफुक्टो जैसे विशाल शिक्षक संगठन के प्रतिनिधियों तक से विमर्श नहीं किया। मोदी सरकार के समर्थक कुछ बुद्विजीवी, संगठन एनईपी को राष्ट्र एवं जनहितैषी साबित करने पर आमादा हैं। एनईपी के पक्ष में जनमत तैयार करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

मीटिंग में तय किया गया कि जन विरोधी,राज्य विरोधी नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के खिलाफ 5 सितम्बर राष्ट्रीय शिक्षक दिवस से 5 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस तक ‘शिक्षा बचाओ आंदोलन’ के साझा मंच के नेतृत्व में सघन जन अभियान चलाया जाएगा।  कोविड संक्रमण से बचाव के लिए फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए धरना,प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान, ज्ञापन, पर्चा, मीटिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे कार्यक्रम आयोजित कर एनईपी को लागू नहीं होने देने के लिए मोदी सरकार पर जन दवाब बनाया जाएगा। जिला एवं तहसील स्तर पर भी एसबीए की इकाई का गठन कर आंदोलन तेज किया जाएगा।

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