केंद्र सरकार की आरक्षण नीति और यूजीसी के निर्देशों का पालन नही कर रही दिल्ली यूनिवर्सिटी

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दिल्ली। भारत सरकार व यूजीसी के 7 मार्च2019 के 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर (डीओपीटी) को लागू न करके 2013 का रोस्टर लागू कर पदों को विज्ञापित किया जा रहा है। कॉलेज/विभागों में आरक्षित पदों पर पढ़ा रहे हैं सैंकड़ो सामान्य वर्गों के शिक्षक। दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी,एसटी टीचर्स एसोसिएशन ,दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम संयुक्त रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय के आरक्षित वर्गो के शिक्षकों के बीच नियुक्ति, पदोन्नति व उनके अधिकारों के लिए संघर्षरत साझा संगठन है। पिछले साल यूजीसी ने एक सर्कुलर जारी कर 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर को समाप्त कर उसके स्थान पर 13 पॉइंट रोस्टर, डिपार्टमेंट वाइज लागू कर दिया गया था जिससे कि आरक्षित वर्ग में एसटी की पोस्ट पूरी तरह से खत्म हो गई थी और जिस रोस्टर में पहले कई पद एससी, ओबीसी कोटे के बन रहे थे उनके स्थान पर सामान्य वर्गो के 6 पदों में से एक पद (ओबीसी ) का ही दिया गया।इसको लेकर देशभर के केंद्रीय, राज्य व मानद विश्वविद्यालयों में धरना प्रदर्शन किया गया था।अंत में भारत सरकार ने इस सर्कुलर को वापिस लेना पड़ा, तत्पश्चात 7 मार्च को यूजीसी ने पुराने नियम को लागू करते हुए 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर लागू करने संबंधी सर्कुलर विश्वविद्यालयों को जारी किया।

केंद्र सरकार द्वारा 7 मार्च 2019 को विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों में 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर को लागू करने के निर्देश जारी किए थे लेकिन उन निर्देशो का दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों द्वारा खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। वह रोस्टर 2 जुलाई 1997 से 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर नहीं बना रहे हैं बल्कि डीयू द्वारा ईसी में पास ईसी रेगुलेशन–64 को 4 सितम्बर 2013 से लागू करते हुए रोस्टर बनाकर पदों को निकालकर उसे लायजन ऑफिसर से पास कर पदों को विज्ञापित कर रहे हैं जिससे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को काफी नुकसान हो रहा है।
7 मार्च 2019 के पत्र के आधार पर देशभर के विश्वविद्यालयों में 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर बनाकर शिक्षकों की नियुक्ति हो रही है लेकिन डीयू प्रशासन इसे नकारते हुए 2013 के ईसी रेगुलेशन-64 सितम्बर, 2013 के आधार पर रोस्टर बनाकर पदों को विज्ञापित कर रहे हैं, जिसमे न तो रोस्टर सीनियरटी से बना रहे हैं और न उसमे रिटायर्ड (सेवानिवृत्त ) शिक्षकों के नामों को शामिल किया जा रहा है जिससे एससी, एसटी, ओबीसी का शॉर्टफाल, बैकलॉग खत्म कर दिया है।जिन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए और ईसी रेगुलेशन- 64 को तत्काल रद्द किया जाना चाहिए ताकि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के साथ सामाजिक न्याय हो सके।

दिल्ली विश्वविद्यालय में एससी, एसटी,ओबीसी और पीडब्ल्यूडी की सीटों पर लंबे समय से सामान्य वर्गों के एडहॉक शिक्षक पढ़ा रहे हैं। कॉलेजों ने जो रोस्टर बनाया हुआ है वह 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर, वरिष्ठता के आधार पर ,कॉलेज/संस्थान को एक यूनिट मानकर नहीं बनाया गया है जिससे आरक्षित सीटों पर सामान्य शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, आज जो शिक्षक इन पदों पर पढ़ा रहे हैं वे समायोजन की मांग कर रहे हैं जो कि असंवैधानिक और केंद्र सरकार की आरक्षण नीति के खिलाफ है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के विभाग/कॉलेज एससी, एसटी, ओबीसी और पीडब्ल्यूडी के रोस्टर, शॉर्टफाल,बैकलॉग, प्रोफ़ेसर काले कमेटी की रिपोर्ट ,उसकी रिकमंडेशन को विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं मान रहा है। हाल ही में डूटा द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में आरक्षित श्रेणी की सीटों को कैसे भरा जाएगा, कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है।बहुजन समाज के शिक्षकों के साथ हो रहे धोखाधड़ी व भेदभाव के खिलाफ तुरंत संज्ञान लिया जाए ताकि आरक्षित श्रेणी के शिक्षकों की सीटों पर नियुक्त शिक्षकों को हटाकर जिसकी सीटे बनती है नियुक्त किया जाए।साथ ही जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग भी आपसे करते हैं।

आज दिल्ली यूनिवर्सिटी में आरक्षण पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है,कॉलेजों के प्रिंसिपलों ने गलत रोस्टर बनाकर उन पर एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति कर अब स्थायी करने की बात हो रही है।संगठन आपसे अनुरोध और मांग करता है कि भारत सरकार व डीओपीटी के निर्देशानुसार 2 जुलाई 1997 से 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर लागू करते हुए शॉर्टफाल, बैकलॉग दिया जाए जिसमे एससी–15 % ,एसटी–7:5 % ,ओबीसी–27 व पीडब्ल्यूडी–4 % आरक्षण देकर जल्द से जल्द स्थायी पदों को भरने के लिए “विशेष भर्ती अभियान “(स्पेशल ड्राइव ) चलाकर , लंबे समय से पढ़ा रहे एडहॉक टीचर्स को स्थायी नियुक्त किया जा सके। जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होती है तो हम उसका स्वागत करेंगे।

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