कलराज मिश्र: शुण्‍य से शिखर तक

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राजस्‍थान की राजनीति के संदर्भ मे सितंबर माह के प्रथम दिन ही राज्‍यपाल कल्‍याण सिंह की जगह श्री कलराज मिश्र नए राज्‍यपाल नियुक्‍त किए गए। इससे पूर्व देवरिया के सांसद रहे कलराज मिश्र को 16 जुलाई 2019 को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया था। उन्होंने 75 वर्ष से अधिक उम्र होने के कारण 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। कलराज मिश्र अपने मधुर स्वभाव, आत्मीयता पूर्ण व्यवहार के लिए जाने जाते रहे हैं,शायद इसीलिए राज्यपाल के रूप मे भी इनका सफरनामा काफी ओजस्वी रहा है।
उप्र में सकारात्‍मक राजनीति के क्षेत्र मे नाना जी देशमुख के बाद कलराज मिश्र को काफी प्रभावी नेता माना गया।
इनका जन्‍म एक जुलाई 1941 को गाजीपुर के मलिकपुर गांव में हुआ। इनके पिता पं. रामाज्ञा मिश्र प्राथमिक पाठशाला में प्रधानाध्यापक थे। माता प्रभावती सामान्‍य जीवन मे विश्‍वास करने वाली धार्मिक महिला थी। विद्यार्थी जीवन में वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता बन गए। 1963 में काशी विद्यापीठ से एमए किया। सात मई 1963 को सत्यवती के साथ विवाह हुआ। उनके दो पुत्र राजन व अमित मिश्र व एक पुत्री डा. हेमलता द्विवेदी हैं।
1963 में संघ के प्रचार के नाते कलराज मिश्र को सबसे पहले गोरखपुर महानगर की जिम्मेदारी दी गई। 1968 में राजनैतिक क्षेत्र में कार्य करने के लिए आजमगढ़ विभाग के भारतीय जनसंघ के संगठन मंत्री नियुक्त किया गया। पार्टी ने 1972 में गुजरात विधानसभा चुनाव में भी इनका सांगठनिक क्षेत्र मे उपयोग किया। 1974 में जयप्रकाश के संपूर्ण क्रांति आंदोलन जब बिहार से चलकर पूर्वी उप्र में पहुंचा तो जनसंघ ने पूर्वांचल में इस आंदोलन के संयोजक का भार कलराज मिश्र को सौंपा था। 1975 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की तो व पूरे देश में सभी दलों के प्रमुख कार्यकर्ताओं को बंदी बनाया गया तो कलराज मिश्र को चार जुलाई को देवरिया जनपद के भलुअनी में गिरफ्तार किया गया। 18 माह बाद वे जेल से मुक्त हुए।
सामान्य परिवार में जन्म लेकर राजनीतिक ऊंचाइयां छूने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने उच्च सदनों में तीस वर्ष से अधिक सदस्य रहे। जीवन में कई उतार चढ़ाव देख चुके मिश्र को नरेन्द्र मोदी मंत्रिमण्डल में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल किया गया थे।
मिश्र तीन बार राज्यसभा और तीन ही बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे। छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ने वाले मिश्र को पहली बार दो अप्रेल 1978 में राज्यसभा का सदस्य नामित किया गया था। संघर्षशील मृदुल व्यक्तित्‍व के धनी श्री मिश्र का राज्‍यपाल के रूप मे राजस्थान मे दुसरा सफर है। आशा करते है कि चिरपरिचित शैली मे अपने काम की औजस्‍विता बरकरार रख पाएंगे ।

-डॉ.भावना शर्मा
झुंझुनू,राजस्थान ।

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