ऐसे हो इंतज़ाम कि वह परीक्षा देकर बगैर वायरस के घर लौट आएं

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नई दिल्ली। बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले देश के लाखों बच्चे कोरोना महामारी के साथ एक और मनोवैज्ञानिक डर यह भी झेल रहे हैं कि इस बार उनकी परीक्षा होगी या नहीं। सरकार कह चुकी है कि सीबीएसई इस पर एक जून को फैसला लेगी। इस बीच इन परीक्षाओं को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर कोई निर्णय नहीं हुआ और अब इस पर 31 मई को सुनवाई होगी।
छात्रों का एक वर्ग और उनके माता-पिता भी चाहते हैं कि परीक्षा हो,लेकिन संक्रमण से बचाव के सख्त इंतज़ाम के साथ हो। लेकिन एक वर्ग इसके हक़ में नही है कि उनके बच्चों को एग्जाम देने के लिए परीक्षा-केंद्रों पर जाना पड़े, क्योंकि वहां भीड़ का जमघट होगा,लिहाजा उनके संक्रमित होने की संभावना ज्यादा होगी।
दोनों ही वर्ग की सोच अपनी जगह ठीक है। लेकिन सरकार को ये देखना होगा कि अगर परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं तो उसके लिए ऐसी तैयारी कि जाए कि एग्जाम सेंटर पर किसी भी तरह की कोई लापरवाही न बरती जाए। कोविड नियमों के पालन में लापरवाही के कारण अगर कोरोना से किसी एक बच्चे की भी जान चली गई तो उसके मां-बाप सरकार को कभी माफ नहीं कर पाएंगे।
लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों का भी ये फर्ज है। कि वे देश के भविष्य का निर्माण करने वाले इन बच्चों के बारे में जल्द निर्णय लें और अगर परीक्षा केंद्रों पर उनका आना जरूरी है तो उसके लिए सरकार को सख्त निर्देश दिए जाएं।लापरवाही बरतने वाले सरकारी अफसरों-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ सजा देने का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली बेंच ने कोरोना महामारी के बीच कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर आज सुनवाई की थी।सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट ममता शर्मा द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र,केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) को सीबीएसई और आईसीएसई कक्षा 12 की परीक्षाओं को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिका में अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रीय परीक्षा आयोजित करने वाले अधिकारियों को विशिष्ट समय सीमा के भीतर वस्तुनिष्ठ पद्धति के आधार पर कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। इस बीच तीन सौ से ज्यादा छात्रों ने भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना को परीक्षा के फिजिकल संचालन के प्रस्ताव को रद्द करने और पिछले साल की तरह एक वैकल्पिक मूल्यांकन योजना प्रदान करने के लिए एक पत्र लिखा है।
हालांकि शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अब तक मिले फीडबैक के आधार पर आम सहमति यह है कि परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। जैसा कि शिक्षा मंत्री ने कहा है। एक जून तक 12वीं की परीक्षा को लेकर अंतिम फैसले की घोषणा की जाएगी। हालांकि जहां केंद्र व कई राज्य सरकारें परीक्षा कराने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। और वहीं कुछ अन्य राज्य और स्टूडेंट्स परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

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