उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया

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बहादराबाद। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं संस्कृत भारती उत्तरांचलम् न्यास के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने वटवृक्ष लगाकर वृक्षारोपण कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में वृक्षों की क्या महत्ता है इसका पता पूरे विश्व को चल चुका है,इसलिए मानव जीवन में पेड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है,विश्व में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण लाखों लोगों ने अपने प्राण गवाए हैं। समूचा विश्व ग्लोबलाइजेशन की चपेट में है,ग्लेशियर पिघल रहे हैं,ऐसे में मानव जीवन को वृक्षों ने ही बचाया है। प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।विधायक ने कहा कि संस्कृत भारती की वृक्षारोपण को लेकर की गई पहल सराहनीय है।
कुलपति प्रोफेसर देवीप्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए वृक्षारोपण हर मानव के कर्तव्य में शामिल करना पड़ेगा,अपने आस पास हर व्यक्ति को न्यूनतम 100 पेड़ अवश्य लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पेड़ मानव के जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ रहते है,इसलिए वेदों में वृक्षों की महत्ता को विस्तार से बताया गया है। विशिष्ट अतिथि संस्कृत भारती के प्रदेश संगठन मंत्री योगेश विद्यार्थी ने कहा कि हम सबका कर्तव्य है कि हम अधिक से अधिक पेड़ों को धरती पर लगाएं,मानव जीवन को बचाने में पेड़ों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा वृक्षों के बिना मनुष्य जीवन की कल्पना नहीं की सकती है। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने आये हुए सभी अतिथियों का परिचय कराते हुए सभी का स्वागत किया। श्री अवस्थी ने कहा कि वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन हमें प्रकृति के साथ जीना सिखाता है,इसलिए ऐसे कार्यक्रम मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा होने चाहिए।कार्यक्रम को उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं संस्कृत भारती न्यास के अध्यक्ष प्रो प्रेम चन्द्र शास्त्री, स्वामी रामतीर्थ मिशन देहरादून के महंत डॉ शिव चंद दास,संस्कृत भारती के जिला मंत्री डॉ पवन कुमार,नगर अध्यक्ष जितेंद्र कुमार,सौरभ सारस्वत ने भी सम्बोधित किया।कार्यक्रम का संचालन संस्कृत भारती के जिलाध्यक्ष डॉ अरविंद नारायण मिश्र ने किया। इस अवसर पर उपकुलसचिव दिनेश कुमार, शोध अधिकारी डॉ महेश ध्यानी, चंद्र प्रकाश पांडेय,जय कुमार,नाथीराम,चरण सिंह,रेखा आदि उपस्थित थे।
वहीं दूसरी ओर वेद विभाग द्वारा “पर्यावरण की वैदिक अवधारणा ” विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
ऑनलाइन संगोष्ठी का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवीप्रसाद त्रिपाठी , कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी एवं मुख्य वक्ता प्रो. राजेश्वर प्रसाद मिश्र ने किया।

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल, हरियाणा के पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. राजेश्वर प्रसाद मिश्र ने कहा कि आज पर्यावरण में विकृति के कारण ही मानव समाज का अस्तित्व खतरे में है। कहा कि वेदों में मानव की सौ वर्ष की आयु की कल्पना की गई है। वेद यज्ञ संस्कृति के प्रवर्तक हैं तथा यज्ञ ही इस सृष्टि के पोषण का मुख्य कारक है। उन्होंने कहा की भौतिक पर्यावरण पांच तत्वों से मिलकर बना है, यदि हमें अपनी पृथ्वी को सुरक्षित और संरक्षित रखना है तो पृथ्वी, जल, अग्नि आकाश और वायु को संरक्षण करना होगा। हमें प्रकृति द्वारा निर्दिष्ट विधि से व्यवहार करना होगा। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जितनी भी समस्याएं हैं वह प्रदूषण के कारण ही हैं, इसलिए स्वस्थ मानव समाज के लिए हमें वेद विहित कर्मों को प्रचारित प्रसारित और आचारित करने की आवश्यकता है। वैदिक ऋषियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है हमें उसे आगे बढ़ाकर संपूर्ण पृथ्वी के पर्यावरण की सुरक्षा हेतु विश्व समुदाय को जागरूक करना चाहिए।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा की पर्यावरण के सुरक्षित रहने से ही मानव समाज सुरक्षित रहेगा। इसलिए हमें वेदों में प्रतिपादित पर्यावरण संरक्षण के उपाय पर विचार विमर्श कर संपूर्ण जगत को प्राकृतिक आपदा से बचाना होगा। कहा कि जिन पदार्थों से हमे जीवन मिलता है हम उन्हें देवता के रूप में पूजते हैं तथा उनका सम्मान करते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम जीव जगत तथा वनस्पति जगत की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। कहा की हमारी परंपरा में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान माना गया है इसलिए वृक्षारोपण कार्यक्रम को बढ़ाकर विश्व के पर्यावरण को संरक्षित रखना होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत डा. सुमन प्रसाद भट्ट ने किया।
प्रस्तावित भाषण सुश्री मीनाक्षी सिंह ने किया।
कार्यक्रम का संचालन वेद विभाग के अध्यक्ष डा. अरुण कुमार मिश्र ने किया।
संगोष्ठी का तकनीकी संयोजन कंप्यूटर विभाग के डा. सुशील चमोली ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो. दिनेश चंद्र चमोला, डा. धीरज शुक्ला, सा. हरीश गुरुरानी अन्य प्राध्यापक, छात्र तथा अन्य गण मान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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