आखिर दिया तले अंधेरा था

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जख्मों की टीस से भी ज्यादा
अंतस का दर्द गहरा था।
किस को कहती बेटी,
आखिर दिया तले अंधेरा था।

हर उठती आवाज को
दबाने का सामान था।
उस अधिकारी को
बड़ी हस्ती का वरदान था।
हद थी निजता के हनन की
चहुँ और पहरा था।

किस को कहती बेटी
आखिर दिया तले अंधेरा था…. 1

लोकतंत्र के थे पहरेदार,
बहुतेरे थे रिश्तेदार।
गहरी बंदरबांट थी,
चुप से थे पहरेदार।
धमकियों के आलम से
भयाक्रांत निर्दोष चेहरा था।

किस को कहती बेटी
आखिर दिया तले अंधेरा था… 2

बड़ी बड़ी हस्तियों ने
कागजों में बेटियाँ बचाई थी।
लोकतंत्र के पहलूओं ने,
बेटी बचाने की शपथ दिलाई थी।
कहा होते शिकवे शिकायत
हर मठ पे पुजारियों का पहरा था।

किस को कहती बेटी
आखिर दिया तले अंधेरा था… 3

– डॉ.भावना शर्मा
झुंझुनूं, राजस्थान

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